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Tuesday, October 26, 2021
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आपकी आभिव्यक्ति – सच लिखना या दिखाना भी गुनाहगार की श्रेणी में ला खड़ा करता है, चौथे स्तंभ का दम भरने वाले पत्रकार हो जाएं सावधान !!!

कृष्णा पंडित

वाराणसी @(कृष्णा पंडित) भारत देश में सैकड़ों पत्रकारों के संगठन रोज नए नए आयाम स्थापित करने को तैयार हैं लेकिन आलम यह है कि ना कोई संगठन अपना वजूद न पत्रकारों की अस्तित्व और ना ही कलम के सिपाही अपनी आबरू बचाने में सफल हो रहे हैं रोज कहीं न कहीं इज्जत का तार तार सत्ता और प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है लेकिन निरंकुश शासन कभी और कहीं भी पत्रकारों की सुरक्षा की बात नहीं करती और ना ही देना चाहती है !

कहने को बहुत बड़े बड़े संगठन पत्रकारों के हित की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और है सिर्फ मात्र बैनर के पीछे होने वाले रहस्मय डील और नकारा पन का बेहतरीन उदाहरण है, जब कभी किसी पत्रकार पर आंच आती है तो वो खुद ही सहन कर आगे की स्थिति को निभाता है !

अलग-अलग जिलों में बैनरों के पत्रकार का यह आलम है कि कुछ बड़े-बड़े अधिकारियों के यहां बैठकर ग्राउंड लेवल पर काम करने वालों पत्रकारों की हकीकत बयां करते हैं!

कलम का सिपाही बहुत ही दयनीय और पर्दे के पीछे है ऊंची ऊंची इमारतों में बैठे संपादक महोदय फोटो और खबरों की पूरी जानकारी की उम्मीद तो लगाए बैठे रहते हैं लेकिन जब उस गरीब असहाय पत्रकार की मदद की बारी आती है तो कोई साथ देने को तैयार नहीं रहता यह समय की विडंबना कहिए या समय की चाल लेकिन यह सत्य है !

बड़े बड़े अखबारों में बड़े-बड़े पत्रकार बड़े अधिकारियों के यहां अपनी पैठ बनाकर धन उगाही करते हैं और दूसरे को बदनाम करने के लिए बहुत ढेर सारी चीजें उनके पास उपलब्ध है जैसे वह जन सूचना विभाग में दर्ज नहीं है वह पुलिस के खिलाफ लिखता है वह बहुत छोटे बैनर में है वह पोर्टल में काम करता है इत्यादि अनेक प्रकार से उदाहरण प्रस्तुत कर खुद की सुरमा गिरी की प्रस्तुति बयां करते हैं !

जहां प्रदेश में पत्रकारों पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार के चुने नुमाइंदे जिला प्रशासनिक अधिकारी की बेताबी भी गजब सी है अपनी नाकामी और नकारे पन को छुपाने के लिए मीडिया पर तोहमत लगा कर उसको धराशायी करना चाहते हैं !

लेकिन सावधान मिटने नहीं देंगे वजूद इसकी जिसकी कदमों तले जन्नत और दुनिया बसती है हम कभी तुम्हारे मंसूबों में कामयाब नहीं होने देंगे चाहे इसके लिए कितनी भी मुकदमे की कुर्बानियां देनी पड़े और कलम की पूजा सच के साथ समाज की सेवा समर्पण भाव के साथ ही होती रही है और होती रहेगी काशी की धरती पर कलम की एक अपनी पहचान है जिस ऊर्जा से लोगों ने पूरे विश्व में अपना नाम और समाज के लिए दर्पण बनने का कार्य किया है और निरंतर करते रहेंगे !

निरंकुश अधिकारियों को चेतावनी

हो जाओ सावधान नहीं तो जिस दिन कलमकार अपने स्वरूप में उतरेगा तुम्हारे द्वारा रचित मायावी झूठी सारी कहानियां खुद-ब-खुद दर्पण बन चित्‍कार मारेंगी, क्या लगता है कुछ दल्ले पत्रकारों को मैनेज कर चौथे स्तंभ को मैनेज कर लोगे यह संभव नहीं है और सोचना भी मत !

यह कोई आक्रोश और उबाल में कही या लिखी कहानी नहीं बल्कि मन में उबलती शब्दों की तस्वीर है जो समाज के सामने रखना जरूरी है !

जब जब पत्रकारों की आबरू पर कोई प्रहार हुआ है वहीं से बदलाव अपनी अपने स्वरूप में जन्मा है और यह भी सत्य है कि झूठे का मुंह हमेशा काला होता है
और सच्चाई का हमेशा बोल बाला होता है !

बनारस में फोटोग्राफर के द्वारा वीडियो वायरल करने पर तत्कालीन एसएसपी के आदेश पर क्षेत्राधिकारी दशास्वमेध की जांच उपरांत छायाकार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया लेकिन मुकदमा के पहले ना किसी प्रकार की पूछताछ और ना ही कोई तथ्यात्मक सबूत खोजने की कोशिश की गई जबकि वायरल वीडियो में बच्चों द्वारा कही गई बात को माने तो पुलिस वहां स्थित पुलिस चौकी का सफाई नौनिहाल बच्चों के द्वारा करवा रही थी लेकिन क्षेत्र अधिकारी के द्वारा जांच में पाया गया कि यह सब प्लांट किया गया था जिसके उपरांत कप्तान के आदेश पर छायाकार पर मुकदमा पंजीकृत कर दिया गया !

बनारस के कई सारे मानिंद पत्रकार ने एडीजी महोदय से मिलकर इस बाबत की पूरी जानकारी दी और कप्तान से भी बात की गयी जिसमें स्पष्ट रूप से कप्तान ने कार्रवाई करने की बात कही !

अब आगे देखना है कि पत्रकारों के द्वारा दी गई तहरीर पर कोई कार्रवाई होती है या फिर वही जांच खानापूर्ति कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है !!

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