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Wednesday, October 27, 2021
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पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य और घटतौली के आरोप में बंद पेट्रोल पंपों पर विशेष- – – – -भोलानाथ मिश्र (आपकी अभिव्यक्ति)

आम जनता को शुद्ध और सही मूल्य पर दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व होता है।सरकार की शिथिलता आमजनता के लिये खतरनाक होती है और उसका फायदा समाज के चंद लोग उठाकर आमजन का खून पीते हैं। इस समय बदलते समय में दो पहिया वाहनों की भरमार हो गयी है और हर घर में कमोवेश हर घर में एक बाइक और हर न्याय पंचायत में छोटे बड़े चार पहिया सवारी व भारवाहक वाहन हो गये हैं। इन्हें चलाने के लिए आम उपभोक्ताओं को डीजल पेट्रोल की व्यवस्था सरकार करती है और बदले में टैक्स वसूलती है।अधिकांश डीजल पेट्रोल किरोसिन तेल दूसरे देशों से आता है क्योंकि वहाँ पर जमीन से पानी अनाज नहीं बल्कि तेल निकलता है।वहाँ के लोग तेल बेचकर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।जबतक इन तेल उत्पादकों में तालमेल रहता है और गिरोहबंद रहते हैं तबतक तेल सस्ता नही होता है लेकिन जब इनका संगठन टूट जाता है तो तेल सस्ता जाता है।जहाँ से तेल आता है वहाँ पर तेल इतना मंहगा नहीं मिलता है जितना यहाँ पर मंहगा मिलता है।एक समय वह भी था जबकि पेट्रोल चार रुपया और डीजल पौने दो रुपया लीटर बिकता था जबकि आज पेट्रोल तिहत्तर और डीजल तिरपन रुपये लीटर के आसपास है।तेल के दामों में पिछले दिनों काफी गिरावट आ गयी थी क्योंकि कुछ समय के तेल उत्पादकों का संगठन टूट गया था।अगर पेट्रोल पर सरकार इतना टैक्स न ले तो यहीँ पेट्रोल तीस रुपये लीटर से भी कम पड़े लेकिन इसी पेट्रोलियम उत्पादों के बल पर सरकार चलाती है।यहीं कारण है कि इसे अबतक जीएसटी के दायरे में नहीं लाया गया है।एक तरफ तो सरकार और तेल रिफाइनरियों की मार को आम उपभोक्ता झेलता है वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल पंपों पर नाप तौल गड़बड़ करके उपभोक्ता को लूट लिया जाता है।धन कमाई के चक्कर में घटतौली के साथ मिलावट तक की जाती है। कम्प्यूटराइज मशीनों में चिप लगा लगा दी जाती है और उपभोक्ताओं की आँखों में धूल झोंक दी जाती है। प्रदेश की योगीजी की सरकार इस बात के लिये बधाई की पात्र है क्योंकि अगर उन्होंने पेट्रोल पंपों के खिलाफ अभियान नहीं चलाया होता तो इस गोरखधंधे का पता तक उपभोक्ताओं को नहीं चल पाता।पहली बार आमजन को अहसास हुआ कि किस तरह उनका गला पट्रोल पंपों पर काटा जाता है। सरकार के विशेष अभियान और विशेष पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारी से तहलका मच गया है।अबतक सैकड़ों पेट्रोल पंपों को सील करके उनकेे खिलाफ मुकदमें दर्ज हो चुके हैं।आश्चर्य की बात तो यह है कि आम पेट्रोलियम उपभोक्ताओं को सही नाप तौल दिलाने वाले खुद मशीन में सील लगाते हैं बिना सील लगाने वालों की मिलीभगत मशीन खोलकर चिप आदि लगाना संभव नहीं है। यह सही है कि पेट्रोल पंप मालिक जो चोरी करता है उसमें से बमुश्किल तीस फीसदी ही उसके हिस्से में आता है और बाकी सत्तर का बंटवारा जिम्मेदारों में हो जाता है।इस बार योगी जी की एटीएस ने सारे जिम्मेदारों की पोल खोलकर और चिप लगाने वाले गिरोह को पकड़कर उन्हें बेनकाब कर दिया गया है।सरकार की इस कार्यवाही के बाद जहाँ जहाँ पर पेट्रोल पंपों को सील कर दिया गया है वहाँ वहाँ पर पिछले कई महीनों से लोगों को ब्लैक में वह भी मिलावटी पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है। एक बात तो है कि एक पेट्रोल पंप बंद हो जाने से एक की जगह अनेकों को रोजी मिल गयी है।यह कालाबाजारी करने वाले छुटभैय्ये दिन भर में सौ दो सौ कमा लेते हैं जिससे उनके घर का खर्चा चल जाता है और उपभोक्ताओं को असुविधा नहीं होती है। इतने लम्बे समय तक पेट्रोल पंपों का बंद होना जनहित में नहीं कहा जायेगा। सरकार ने अगर इन्हें बंद कराया है तो वैकल्पिक व्यवस्था करना भी सरकार का दायित्व बनता है। जिन लोगों के खिलाफ जाँच में कोई खास कमी न पायी गई हो उन्हें खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस ले लेना पेट्रोलियम उपभोक्ताओं के हित में होगा। इससे जहाँ कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा वहीं उपभोक्ता को बिना मूल्य वृद्धि के बढ़े मूल्य भुगतान करना पड़ रहा है।जहाँ जहाँ पर पेट्रोल पंप सील बंद किये गये हैं वहाँ वहाँ वैकल्पिक व्यवस्था होना उपभोक्ताओं के हित में आवश्यक है।

– लेखक भोलानाथ मिश्र – वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी ।

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