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Tuesday, October 26, 2021
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राजनीति का अपराधीकरण और अपराधिक राजनेताओं पर चल रहे मुकदमों पर विशेष। —– भोलानाथ मिश्र

आजादी के समय की राजनीति और राजनेताओं के पास चरित्र था जो अब वह धीरे धीरे समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। लोकतंत्र में राजनीति समाज के चरित्रवान ईमानदार जुझारू वसूल सिद्धांतों पर चलने वाली की होती है जिसका अभाव आज पैदा हो गया है। लोकतंत्र में राजनीति समाज सेवा पर आधारित मानी जाती है किन्तु इधर राजनीति सेवा नहीं बल्कि अपराधिक प्रवृत्ति वालों की धरोहर और खाने कमाने का साधन हो गयी है। अब समाजसेवा करने, संघर्षशील, चरित्रवानों ,ईमानदारों का राजनीति में कोई महत्व नहीं रह गया है।इस समय राजनीति और राजनेता स्वच्छ बेदाग छबि वालों की नही बल्कि दागदार छबि वाले अपराधिक प्रवृत्ति वालों की हो गयी है।अपराधियों को राजनीति में संरक्षण मिलने लगा है जिससे अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के लिये राजनीति संरक्षणगाह और शरणस्थली बनती जा रही है। राजनेता हमेशा राजनीति को सुरक्षित रखने के लिए अपने हित में नियम कानून बनाता बिगाड़ता.रहता है और जब तक मुकदमा चलता रहता है तबतक वह राजा हरिश्चंद्र बना रहता है।यहीं कारण है कि देश के आज डेढ़ हजार से ज्यादा माननीय सासंदों एवं तेरह हजार से ज्यादा माननीय विधायकों के विरुद्ध विभिन्न अदालतों में लम्बे समय से अपराधिक मुकदमें विचाराधीन नहीं बल्कि जानबूझकर राजनैतिक दबाव में लम्बित चल रहें हैं। जब राजनेता को छोटी अदालत से सजा हो जाती है तो वह अपील करके कानूनी संरक्षण ले लेता है।इस समय राजनीति में अपराधिक प्रवृत्ति का बोलबाला है लेकिन अब समय के साथ सरकार ने अपना रूख बदला है।जिसके फलस्वरूप लोकसभा में सवाल उठाने के नाम पर रिश्वत लेने के एक पुराने मामले में अदालत की विशेष पीठ ने मुकदमा चलाकर शीघ्र फैसला सुनाने का पिछले दिनों निर्णय लिया है।इधर सरकार द्वारा चलाई जा रही मुहिम में अदालतें भी गंभीर हो गयी लगती हैं। अभी परसों सरकार ने एक और जरूरी तथा महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इस फैसले से उन दागी विधायकों एवं सांसदों की नींद हराम हो गयी है जिनके विरुद्ध वर्षों से अपराधिक मुकदमें चल रहे थे। क्योंकि फैसला आने के बाद मुकदमे की आड़ में अपराधिक प्रवृत्ति के राजनेताओं की राजनीति बंद हो जायेगी जैसे लालूप्रसाद यादव आदि की हो गयी है।डेड़ हजार से अधिक सांसदों और साढ़े तेरह हजार विधायकों के खिलाफ लम्बित मुकदमों की विशेष सुनवाई समय सीमा के अंदर करने के लिये एक दर्जन विशेष अदालतों का गठन किया जायेगा।सरकार का यह फैसला निश्चित तौर पर एक स्वागत योग्य एवं प्रशंशनीय है।मुकदमों की सुनवाई में देरी जहाँ वादकारी का खर्च बढ़ाती है वहीं न्याय प्रभावित होता है।राजनीति को अपराधीकरण होने से बचाना और स्वच्छ ईमानदार संघर्षशील लोगों का पुनः राजनीति में प्रवेश स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी हो गया है।

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