29 C
Mumbai
Tuesday, October 19, 2021
Homeआपकी अभिव्यक्तिराहुल गांधी की ‘राजनीतिक-रेसिपी में स्वामी के आंकड़ों का ‘तड़का’ ! -------...

राहुल गांधी की ‘राजनीतिक-रेसिपी में स्वामी के आंकड़ों का ‘तड़का’ ! ——- उमेश त्रिवेदी

भाजपा के राज्यसभा-सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी भले ही खुद कभी न चौंकें, लेकिन दूसरे राजनेताओं को चौंकाने में वो माहिर हैं। अहमदाबाद में चार्टर्ड अकाउंटेंटों के आयोजन में स्वामी ने वित्तमंत्री अरुण जेटली सहित समूची मोदी-सरकार को यह कहते हुए चौंका दिया कि केन्द्र-सरकार द्वारा जारी जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े बोगस हैं। स्वामी का खुलासा कांग्रेस-अध्यक्ष राहुल गांधी के उन आरोपों को पुख्ता करता है कि मोदी-सरकार की बुनियाद ही झूठ पर टिकी है। राहुल के आरोपों की शाही-सवारी में स्वामी की शिरकत मोदी-सरकार के विश्वास में दरारें पैदा करेगी।
स्वामी ने सब कुछ उनके बुनियादी चरित्र के हिसाब से किया है। भाजपा में एक तबका उन्हें भस्मासुर के विशेषणों से यूं ही नहीं नवाजता है। स्वामी कब, किसके सिर पर हाथ रखकर भस्म कर देंगे, यह अनुमान लगाना मुश्किल है? उनके बड़बोलेपन की अग्नि-वर्षा में कोई भी झुलस सकता है। स्वामी जाने-माने अर्थशास्त्री हैं। खुद को जेटली से बेहतर वित्तमंत्री भी मानते हैं। भाजपा की ओर से राज्यसभा में नामजदगी के वक्त भी उनके यही विचार थे और आज भी वो इन विचारों से डिगे नही हैं। दिक्कत यह है कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें जेटली का बेहतर विकल्प नहीं मानते हैं।
जेटली और स्वामी के बीच जमा एसिड की तीखी गंध कभी भी भाजपा और आरएसएस की संयुक्त-लेबोरेटरी के दरवाजे-खिड़की लांघ कर सत्ता के गलियारों में दहकने लगती है। जेटली-स्वामी के अन्तर्विरोधों की कहानी के सिरे भले ही नदारद हों, लेकिन इससे उनके संवादों की राजनीतिक-गंभीरता को कमजोर अथवा निष्प्रभावी नहीं माना जा सकता है।
स्वामी ने बताया कि मोदी-सरकार ने चुनाव के दरम्यान नोटबंदी और जीएसटी को न्यायसंगत और तर्कसंगत बताने के लिए जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों को खासतौर से जारी किया था। गौरतलब है कि उस वक्त मूडीज और फिच जैसी अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट-एजेंसियों ने भी मोदी-सरकार के वित्तीय-सुधारों को क्रांतिकारी बताते हुए दावा किया था कि गरीबी के आंगन में सोने की चिड़ियाओं के चहचहाने में ज्यादा देर नहीं है। विकास के सुनहरे सपनों को घना करने वाली आर्थिक सुधार की ये रिपोर्टें मतदाताओं में विश्वास पैदा करने के लिए जारी कराई या की गई थीं। मूडीज और फिच क्रेडिट एजेन्सियों की रिपोर्टों के संबंध में स्वामी की राय है कि एजेन्सियों को पैसा देकर कोई भी ऐसी रिपोर्टें बनवा सकता है।
स्वामी ने विकास के सब्जबागों को मटमैले बियाबानों में बदलते हुए कहा कि आप लोग जीडीपी के तिमाही आंकड़ों पर विश्वास मत करो। यह सब बोगस और गलत हैं। केन्द्र-सरकार ने अधिकारियों पर दबाव डाल कर अच्छे आंकड़े पेश करने की हिदायत दी थी, ताकि ऐसा लगे कि नोटबंदी से देश की अर्थ-व्यवस्था को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
स्वामी की बातें इसलिए गौरतलब हैं कि वो तथ्यों की पड़ताल के बाद अपनी बातें कह रहे थे। स्वामी ने दिलचस्प खुलासा किया कि वो केन्द्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा के साथ केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन के कार्यालय में गए थे। स्वामी इस संगठन की कार्य-पद्धति को बेहतर ढंग से इसलिए समझते हैं कि उनके पिताजी ने ही यह ऑफिस स्थापित किया था। वहां अधिकारियों ने जानकारी दी थी कि सरकार नोटबंदी के परिणामों को सकारात्मक बताने के लिए अच्छे आंकड़ों को पेश करने का दबाव बना रही है। वो खुद इस मत के हैं कि नोटबंदी का अर्थ-व्यवस्था पर विपरीत असर पड़ने वाला है। स्वामी ने आंकड़ों के संबंध में केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन के निदेशक से यह भी जानना चाहा था कि नवम्बर 2016 में होने वाली नोटबंदी के बाद 1 फरवरी 2017 को कैसे इस निष्कर्ष पर पहुंच गए थे कि नोटबंदी का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है।
स्वामी मानते हैं कि मोदी-सरकार की आर्थिक नीतियों की दिशा सही नहीं है। भले स्वामी का नजरिया अकादमिक हो, लेकिन वह राहुल के लिए लाभदायक हैं। राहुल ने गुजरात में हर जगह यही कहा था कि मोदी की राजनीतिक-संरचना झूठ पर टिकी है। गुजरात-मॉडल दिखावा है और विकास की बातें जुमले के अलावा कुछ नहीं हैं। आगे भी कांग्रेस की रणनीति मोदी-सरकार की जुमलेबाजी पर ही केन्द्रित रहने वाली है। इस दिशा में स्वामी का स्टैण्ड राहुल को मजबूती देने वाला होगा। राहुल के आरोपों की राजनीतिक-रेसिपी में स्वामी के आंकड़ों का तड़का जनता के सामने चटखारे लेने का अच्छा सामान है।

– लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments