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Sunday, October 17, 2021
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सऊदी किंग ने ईरान के ख़िलाफ़ आरोपों की झड़ी लगा दी, कहा अरामको पर 286 मिसाइलों और 289 ड्रोन से किया हमला

सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने कहा है कि तेल प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले आर्थिक विकास को पटरी से नहीं उतार सके और रियाज़ अपनी रक्षा करने में किसी हिचकिचाहट से काम नहीं लेगा।

विदेश – सितम्बर में सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर हुए हवाई हमलों का आरोप ईरान पर लगाते हुए किंग सलमान ने 8 मिनट के अपने वार्षिक संबोधन में कहाः विश्व समुदाय को तेहरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों तथा क्षेत्रीय देशों में हस्तक्षेप को रोकना चाहिए।

सऊदी किंग का कहना था कि ईरान द्वारा फैलायी जा रही अराजकता और विनाश को रोकने का समय आ गया है।

किंग सलमान ने ईरान पर तेल प्रतिष्ठानों के हमले का आरोप ऐसी स्थिति में लगाया है, जब इन हमलों की ज़िम्मेदारी यमन ने ली थी, जिस पर सऊदी सैन्य गठबंधन पिछले क़रीब पांच से भीषण बमबारी कर रहा है।

ईरान पहले ही इन हमलों में शामिल होने के आरोपों को निराधार बताकर इन आरोपों को ख़ारिज कर चुका है।

वहीं सीरिया और इराक़ी सरकारों का कहना है कि सऊदी अरब ने अमरीका, इस्राईल और यूरोपीय देशों के साथ मिलकर दाइश जैसे ख़ूंख़ार आतंकवादी गुटों को जन्म दिया, ताकि हिंसा और रक्तापात फैलाकर इन देशों की सरकारों का तख़्तापलट करके इस्राईल विरोधी इस्लामी मोर्चे को कमज़ोर किया जा सके।

सऊदी किंग सलमान ने दावा किया कि उनके देश पर 286 बैलिस्टिक मिसाइलों और 289 ड्रोन विमानों से हमला किया गया और किसी भी देश पर अब तक ऐसा हमला नहीं हुआ, इसके बावजूद इससे देश का विकास और नागरिकों का जीवन प्रभावित नहीं हुआ।

उन्होंने हमलों के बाद शीघ्र मरम्मत का कार्य पूरा करके तेल उत्पादन को सामान्य बनाने के लिए सऊदी तेल कंपनी अरामको की प्रशंसा भी की।

ग़ौरतलब है कि सितम्बर में हमलों के बाद सऊदी अरब का तेल उत्पादन में 50 प्रतिशत से भी अधिक की कमी आ गई थी।

सऊदी किंग के दावे के विपरीत अमरीका समेत विश्व भर के विशेषज्ञों का मानना है कि हमलों में क्षतिग्रस्त अरामको के तेल प्रतिष्ठानों की मरम्मत में एक साल और उससे भी अधिक का समय लग सकता है।

मध्यपूर्व में 2011 में सीरिया में आतंकवादी गुटों के सक्रिय होने और गृह युद्ध छिड़ने तथा 2015 में सऊदी सैन्य गठबंधन द्वारा यमन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने से तनाव में वृद्धि हुई और 2018 में अमरीका के परमाणु समझौते से निकलने और ईरान पर फिर से आर्थिक प्रतिबंध लगाने के बाद तनाव अपने चरम पर पहुंच गया।

साभार पार्सटूडे

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