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Tuesday, October 26, 2021
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स्लीप पैरालाइसिस: डर या बीमारी, आइए जानें……

कभी कभी सोते हुए अचानक आपकी नींद खुलती है और आपको लगता है कोई डरावना चेहरा आपके सामने बैठा है, आप देख तो सब रहे होते हो पर हिल डुल नही पाते, बोल नही पाते, ऐसी स्थिति में लोग बहुत ज्यादा डर जाते हैं ।

इस स्थिति से अगर आप गुजर चुकें हैं तो ये जानकारी आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है , अगर नहीं गुजरे तो आने वाले समय मे गुजर सकते हैं ।
तो आज मैं आपको बताऊंगा की ऐसी स्थिति क्यूँ पैदा होती है और किस प्रकार ऐसी स्थिति का सामना किया जाए ।
दुनिया मे बहुत सारे लोगों के साथ ये घटनाएं होती हैं । सोने के बाद जागने पर इंसान को ऐसा महसूस होता है कि कोई डरावना चेहरा उसके सामने बैठा है और हम खुद को उसके चंगुल से छुड़वा नही पा रहे हैं , हम खुद को छुड़वाने की कोशिश करते हैं पर हम छुड़वा नही पाते , हमारे हाथ पैर काम नहीं करते ।
यह स्थिति बहुत डरावनी हो जाती है ,कई बार हमे लगता है जैसे वो डरावनी आकृति हमे मार डालेगी । पर थोड़ी देर में वो डरावना चेहरा गायब हो जाता है और हम डर जाते हैं , ज्यादातर लोग इसे भूत प्रेत जिन्न द्वारा पकड़ लिया जाना बताते हैं ,या फिर आने वाले समय में होने वाली किसी अनहोनी ,अपशकुन से जोड़ देते हैं ।


ज्यादातर लोग ऐसी स्थिति में तांत्रिकों मौलवियों कर्मकांडियों के पास चले जातें हैं ,जो पूजा पाठ, कर्मकांड गंडे ताबीज बंधवाना जैसे उपाय बता देते है , कई लोग इन उपायों से ठीक भी हो जातें है और कुछ लोग आगे से आगे उलझते जातें हैं, जबकि इस समस्या का इलाज बहुत ही आसान होता है 
आईये अब जानते हैं विज्ञान इस विषय पर क्या कहता है 
विज्ञान के अनुसार ये एक मानसिक समस्या है जिसे स्लीप पैरालिसिस बोला जाता है ।

सपने हमारे दिमाग के स्टोरेज स्पेस मे चलते हैं । हमारे दिमाग मे चल रहे सपनों से हमे यह लगता है जैसे सभी घटनाएं असल मे चल रही हों ,वास्तविक रूप में घटित हो रही हों ।
जब हम सोई अवस्था मे होतें हैं तो हमारे शरीर मे आंखों की पुतली हाथ पैर गर्दन व अन्य अंगों की मांसपेशियां लगभग निष्क्रिय हो जाती हैं ताकि हम सपने में उठ कर चलने न लग जाएं और अपना नुकसान न करवा बैठें । जबकि हमारे शरीर के अंदर का तंत्रिका तंत्र काम करता रहता है जिससे दिल, फेफड़े,गुर्दे जैसे अंग अपना काम करते रहते हैं । 
सामान्य अवस्था मे जब हमें कोई डरावना सपना आता है तो हमारी नींद खुल जाती है और हमे पता लग जाता है कि ये एक सपना था । 
जबकि स्लीप पैरालिसिस की समस्या एक असामान्य अवस्था है जिसमे हमारी आंखें खुली होती हैं ,हमे लगता है कि हम जाग रहे हैं पर हमारा बाकी शरीर काम नही करता निष्क्रिय रहता है , हम हाथ पैर उठाने में नाकामयाब रहते हैं 
इस तरह की असामान्य अवस्था मे दो तरह के हालात पैदा हो जातें हैं 
पहला आंखों के आगे डरावनी आकृति नजर आना 
दूसरा ऐसा महसूस होना जैसे किसी ने हमे जकड़ लिया हो 
आईये थोड़ा विस्तार से जानते हैं

हमारे दिमाग मे चल रहे सपनों के अंदर जब हमें कोई डरावनी आकृति दिखाई देती है तो हमारा मस्तिष्क डर जाता है । वो खुद को उस आकृति से बचाने के लिए आंखों ,हाथ पैर व अन्य अंगों की मांसपेशियों को सिग्नल भेजता है ताकि भाग कर या हाथों का इस्तेमाल कर उसे दूर भगा सके, अपना बचाव कर सकें । 
जब यह सिग्नल आंखों तक पहुंचता है तो आँखे खुल जाती हैं , सपने में दिखाई देने वाली डरावनी आकृति का हमारे मस्तिष्क पर इतना गहरा प्रभाव हो जाता है कि आंखें खुलने के बाद भी वो हमे आंखों के सामने दिखाई देती है , जबकि वो असल मे मस्तिष्क की कल्पनाओं में होती और हम उस दृष्टि भृम को सच मान लेते हैं ।
यह आकृति मस्तिष्क के दृष्टि पटल से गायब होने में कुछ समय लेती है , बिल्कुल वैसे ही जैसे हम टेलिविज़न को बन्द करते हैं तो आखरी तस्वीर का प्रतिबिंब थोड़ी देर तक वहीं दिखाई देता है । तो इस सपने में चल रही आकृति हमे आंखों के सामने नजर आती है जबकि वो हमारे मस्तिष्क में होती है 
थोड़ी देर में बाहर की रोशनी के मस्तिष्क तक पहुंचने के बाद ये आकृति पूरी तरह गायब हो जाती है और दृष्टि भृम खत्म हो जाता है

अब बात करते हैं भूत द्वारा जकड़ा हुआ महसूस होने की 
हमारा मस्तिष्क सपने में कुछ डरावनी चीज दिखने के बाद शरीर के अंगों को उठने के लिए,अपना बचाव करने के लिए संदेश भेजता है 
भेजा गया सिगनल कई बार दिमाग के कंफ्यूज़ हो जाने के कारण मांसपेशियों तक नहीं पहुंच पाता जिसके कारण हम चाहते हुए भी हाथ पैरों का इस्तेमाल नहीं कर पाते ,करवट नहीं ले पाते । हम हाथ हिल कर उस आकृति को भगाना चाहते हैं , या पैरों का इस्तेमाल कर खुद भागना चाहते हैं , पर हाथ पैरों तक संदेश न पहुंच पाने के कारण हम नाकामयाब रहते हैं , ऐसे हाथ पैर की निष्क्रिय हो जाने के कारण हमें लगता है जैसे हमे किसी भूत ने जकड़ लिया हो ओर हम कुछ कर नही पा रहें हैं । इस समय हमारी आंखे खुली होती हैं पर हाथ पैर सोई अवस्था मे ही रहते हैं । थोड़ी देर बाद हमारे हाथ पैरों में सक्रियता आ जाती है क्योंकि तब तक दिमाग द्वारा भेजा गया सिग्नल वहां तक पहुंच जाता है और हम जागी हुई अवस्था मे पहुंच जातें हैं ।

जब यह डरावनी आकृति आंखों के आगे ज्यादा देर तक बनी रहती है और हम हाथ पैरों से बचाव करने में असमर्थ पातें हैं तो यह स्थिति बहुत डरावनी हो जाती है । ऐसी स्थिति को ही स्लीप पैरालिसिस बोला जाता है । इस स्थिति में दिमाग द्वारा भेजे गए सिग्नल कुछ कारणों से सभी अंगों तक सही से नही पहुंच पाते ।

यह बीमारी समस्या आप खुद ठीक कर सकतें हैं , बस इसको सामान्य लें, डरें नहीं और ये जान लें कि हमारे मस्तिष्क के अंदर काल्पनिक सपने बनते रहते हैं ,और इनका वास्तविकता से कोई लेना देना नही होता ।
कई बार ऐसे दृश्य 30 सेकण्ड्स से अधिक भी हो जाते हैं या बार बार आतें हैं जो कि किसी गहरी समस्या के कारण हो सकतें हैं 
इनमें से कुछ कारण इस प्रकार हैं

*- अनुवांशिक कारण
*-नींद पूरी न हो पाती हो
*-नींद का रूटीन गड़बड़ हो
*-बाईपोलर डिसऑर्डर समस्याओं 
*-स्लीप डिस्ऑर्डर्स से गुजर रहा हो
*-किसी मानसिक स्थिति के लिए दवाइयां ले रहे हो
* सीने में हाथ रख कर सोने से 
*शराब का ज्यादा सेवन करने से 
*सोने का गलत तरीका होने पर 
* ज्यादा हॉरर मूवीज या शो देखने पर 
* ज्यादा धार्मिक क्रियाओं में लिप्त रहने पर

इसके अलावा स्लीप पैरालिसिस डिसऑर्डर में कई बार इंसान खुद को खाई में गिरता महसूस करता है या खुद को शरीर से बाहर भी महसूस करता है । ये सब स्लीप डिसऑर्डर के ही रूप हैं ।
वास्तव में यह कोई बीमारी नही है ,यह सिर्फ एक मानसिक समस्या है , इसमे आपका कोई नुकसान नही होता , यह नींद में सपने की बात है , नींद में गलतफहमी है ।


इसलिए सपनो के समय होने वाली इस समस्या को सामान्य लें और ज्यादा होने पर तांत्रिक ओझा के चक्कर में पड़ने की बजाय डॉक्टर को दिखाएं , जितना आप इस बीमारी से डरेंगे ये उतनी बढ़ती जाएंगी , तांत्रिक लोग भी आपका डर निकालने के लिए तरह तरह के उपाय बता देते हैं ,जबकि इस बीमारी में ऐसे उपायों की कोई जरूरत नही होती 
आपको यह समझना है कि ये खाली काल्पनिक सपना है और नींद के सिस्टम की गड़बड़ है ।
इसलिए जब भी कभी आप समस्या से गुजरे या कोई और नजदीकी गुजरे तो घबराएं नही,बल्कि उसके वास्तविक कारणों को जानकर समस्या का हल करे और अन्धविश्वश के चक्कर से बचें और बचाएं । 
आपकी यह सामान्य सी जानकारी की यह समस्या मस्तिष्क की काल्पनिक कहानियों ओर नींद की गड़बड़ से पैदा हुई है , आपको तांत्रिक ओझा के जाल से बचा कर रखेगी।


यह लेख 1 महीने के गहन शोध के बाद ये पोस्ट कर रहा हूँ , और इसमे विशेष सहयोग Dr Jay Prakash और Vikas A जैसों मित्रों का रहा है । डॉक्टरी भाषा मे यह NREM और REM से संबंधित विषय है पर आमजन को समझ आ जाये इसलिए उस अनुसार साधारण तरीके से ही लिखा है 
इस विषय पर internet ओर Youtube पर भी काफी जानकारी उपलब्ध है

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