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Wednesday, October 27, 2021
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जेएनयू के हॉस्टल की बढ़ी फ़ीस पर इतना हंगामा क्यों ?

दिल्ली – जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में होस्टल फ़ीस बढ़ाए जाने का मामला इतना तूल पकड़ा कि इसके विरोध में छात्र न केवल सड़कों पर उतर आए बल्कि सोमवार को देश की संसद की तरफ कूच भी कर दिया था. हालांकि केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों के इस संसद मार्च को पुलिस ने रोक दिया और इलाके में धारा 144 लगा दी थी, मंगलवार को संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में इस पर हंगामे के बाद सदन को स्थगित करना पड़ा।

चलिए जानते हैं कि आख़िर क्या है पूरा मामला ?

जेएनयू प्रसाशन ने एक नवंबर को एक विज्ञप्ति जारी कर इस विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रह रहे छात्रों से वसूले जा रहे शुल्क को बढ़ा दिया. इसमें कमरे का किराया से लेकर बिजली, पानी और मेंटेनेंस के शुल्क तक शामिल हैं।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़ विश्वविद्यालय परिसर के दो हॉस्टल में रहने वाले छात्र बिजली और पानी की कीमतें पहले से ही चुका रहे हैं लेकिन अन्य 16 छात्रावास के छात्रों को मेंटेनेस की ये फ़ीस नहीं देनी पड़ती थी।

जेएनयू रजिस्ट्रार की तरफ से जारी इस विज्ञप्ति के मुताबिक़ मेंटेनेस पर सालाना 10 करोड़ रुपए ख़र्च किए जाते हैं और अब देश के बाक़ी विश्वविद्यालयों की तरह ही यहां के सभी छात्रों को खपत के मुताबिक़ बिजली, पानी, अन्य सर्विस चार्ज (सैनिटेशन, मेंटेनेंस, रसोइया, मेस हेल्पर इत्यादि) चुकता करने होंगे. इस शुल्क को 1700 रुपए मासिक रखा गया।

जेएनयू के छात्र बढ़ी फ़ीस से नाखुश हुए और इसके विरोध में तब से ही जेएनयू परिसर के एडमिन ब्लॉक के पास धरने पर बैठे हैं।

जेएनयू के प्रशासनिक भवन पर छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद जेएनयू प्रशासन ने बढ़ी हुई फ़ीस को बीपीएल छात्रों के लिए कम करने की घोषणा कर दी लेकिन छात्रों ने यह कहते हुए इस आंदोलन को और तेज़ कर दिया कि पुराने शुल्क ही लागू किए जाएं, उन्हें इसमें किसी भी तरह की बढ़ोतरी मंज़ूर नहीं है।

फ़ीस वृद्धि को वापस लेने पर छात्र क्यों अड़े ?

2017-18 में दी गई विश्वविद्याल की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक यहां 40 फ़ीसदी छात्रों के परिवार की मासिक कमाई 12 हज़ार रुपए से कम है।

आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों को विश्वविद्यालय की तरफ से 2000 रुपए की मासिक सहायता दी जाती है लेकिन इन छात्रों के लिए बढ़ा हुआ होस्टल फ़ीस चुका पाना इससे भी संभव नहीं होगा।

छात्र संघ ने इसकी जानकारी केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को भी दी थी. उनके मुताबिक़ अगर फ़ीस में वृद्धि की जाती तो इसका मतलब यह होगा कि 40 फ़ीसदी छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ सकती है।

जेएनयू की वेबसाइट के मुताबिक यहां हॉस्टल में छात्रों की कुल संख्या 6,349 है. 2017 में यहां 1,556 छात्रों ने एडमिशन लिया था. इनमें 623 छात्रों के परिवार की मासिक आय 12 हज़ार रुपए से कम थी।

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