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Tuesday, October 19, 2021
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अमरीकी सैनिक विशेषज्ञों ने पहले ही सऊदी अरब से कह दिया था कि वह यमन युद्ध जीत नहीं पाएगा बल्कि दीवालिया हो जाएगा !

रिपोर्ट – सज्जाद अली नायाणी

सऊदी अरब को क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान को मार्च 2015 में यमन पर हमला शुरू करते वक़्त अमरीकी सैन्य विशेषज्ञों का विचार बकवास लगा था जिसमें उन्होंने आशंका जताई थी कि यमन युद्ध जीत पाने के बजाए सऊदी अरब इस युद्ध में फंस कर दीवालिया हो जाएगा।

विदेश – दि अमेरिकन कंज़रवेटिव वेबसाइट ने मार्क पेरी का लेख प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने एक सैनिक कमांडर की बात लिखी कि हमने कभी सोचा भी नहीं था कि सऊदी अरब इस युद्ध में कूद पड़ेगा। हमें बहुत झटका लगा और हम शुरू से ही सऊदी अधिकारियों से कह रहे थे कि आप यह युद्ध नहीं जीतेंगे बल्कि इस दलदल में फंस जाएंगे। मार्क पेरी का कहना है कि अमरीकी सैनिक कमांडर की बात बिल्कुल सही साबित हुई है। हौसियों को बहुत कमज़ोर समझा जाता था हालांकि 2015 से पहले अमरीका भी अलक़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई में हौसियों की मदद लिया करता था। अमरीकियों को अच्छी तरह पता था कि जब सऊदी अरब ने यमन पर हमला शुरू कर दिया है तो हौसी अब ईरान से मदद मांगेगे और अमरीका यही नहीं चाहता था। यही वजह है कि अमरीकी सेना के एक भाग ने साफ़ महसूस कर लिया कि यमन पर हमला करने का फ़ैसला बिल्कुल ग़लत था।

दिवंगत अमरीकी सेनेटर जान मैक्केन का मानना था कि सऊदी अरब ने यमन पर हमला करने का फ़ैसला अमरीकी प्रशासन से भी छिपाया था क्योंकि ईरान के साथ परमाणु समझौता किए जाने से सऊदी अरब में बड़ी नाराज़गी थी। सऊदी अरब के साथ जो देश शामिल थे वह भी हमें कुछ नहीं बताना चाहते थे। यह सब इसलिए था कि सऊदी नेतृत्व को यक़ीन था कि वह यमन में जिस तरह का बदलाव लाना चाहते हैं बहुत आसानी से कर ले जाएंगे।

अमरीकी कमांडर माइकल होर्टन के अनुसार सऊदी अरब की यह बहुत बड़ी भूल थी क्योंकि वह समझ बैठा था कि जब उसके पास भारी मात्रा में हथियार मौजूद और हथियार बनाने वाले देश इन्हें बेचने के बहाने ढूंढ रहे हैं तो इस स्थिति में यमन जैसे देश में युद्ध जीतना कौन सी बड़ी बात है। लेकिन यहां सऊदी अरब ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि उसके कमांडर प्रमोशन ले ले कर बड़े पदों पर तो पहुंच गए हैं लेकिन अनुभव के मामले में वह ज़ीरो हैं।

अब हालत यह हो गई है कि आरामको पर हमला हुआ और सऊदी अरब हिल गया। रियाज़ सरकार को पहली बार दर्द का आभास हुआ। इससे पहले नजरान, जाज़ान, अबहा यहां तक कि रियाज़ में हमले हुए मगर आरामको ने सऊदी अर्थ व्यवस्था को लंगड़ाने पर मजबूर कर दिया। यह विचार बिल्कुल दुरुस्त निकला कि यमन युद्ध सऊदी अरब को दीवालिया कर चुका है।

पेंटागोन के अधिकारी का कहना है कि इस टकराव में अमरीका की स्थिति का आंकलन किया जाए तो उसकी सैनिक छावनियां ईरान के चारों तरफ़ हैं। अर्थात अमरीका ने ईरान को चारों ओर से घेर रखा है लेकिन इस बीच यह सच्चाई यह है कि ईरान हिज़्बुल्लाह और अंसारुल्लाह जैसे संगठनों तथा अपने घटक देशों की मदद से अमरीका के घटकों की नाकाबंदी करने में कामयाब हो गया है। अमरीका ने ईरान की सैनिक और आर्थिक नाकाबंदी की तो ईरान ने इसमें सेंध लगाने की कोशिश करने के बजाए जवाबी स्ट्रैटेजी के तहत इस्राईल को घेर लिया और सऊदी अरब भी घिर गया है, इमारात की हालत तो और भी पतली है। दूसरी बात यह है कि विदेश मंत्री पोम्पेयो जो भी बयान दें लेकिन सच्चाई यह है कि अमरीका की सैनिक पकड़ बहुत तेज़ी से कमज़ोर पड़ रही है।

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