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Wednesday, October 27, 2021
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इस्राईली अख़बार हारेत्ज़ की समीक्षा, आरामको पर हमले से तेल अवीव में हड़कंप क्यों ?

रिपोर्ट – सज्जाद अली नायाणी

इस्राईल के एक प्रतिष्ठित समाचारपत्र ने अपने लेख में लिखा है कि सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर होने वाले हालिया सटीक व प्रभावी हमले ने अपने सैन्य व औद्योगिक प्रतिष्ठानों की कमज़ोरी को लेकर तेल अवीव को गहरी चिंता में डाल दिया है।

विदेश – तेल अवीव से प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र हारेत्ज़ ने अपने एक लेख में लिखा है कि सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हुए हालिया हमले ने सबसे अधिक इस्राईल को आतंकित कर दिया है। पत्र का कहना है कि इस्राईल को जिस चीज़ ने अधिक आतंकित कर दिया है वह प्रतिबंधों को समाप्त करने के उद्देश्य से अमरीका को मजबूर करने के लिए इन हमलों में इस्लामी गणतंत्र ईरान के लिप्त होने की आशंका है। यह ऐसी स्थिति में है कि यमन की सेना और स्वयं सेवी बलों ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है। हारेत्ज़ के अनुसार पश्चिम की गुप्तचर सेवाओं को पूरा विश्वास है कि इस अभूतपूर्व हमले में ईरान का हाथ है कि जिसने सऊदी अरब के तेल उद्योग को व्यापक नुक़सान पहुंचाया है, संसार की ऊर्जा मंडी में उथल-पुथल मचा दी है और फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती अरब देशों के शासकों की नींद उड़ा दी है।

इस समाचारपत्र ने लिखा है कि इस्राईल के विचार में सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हमला, एक निर्णायक घटना है, जिसके परिणाम, ट्रम्प की कार्यवाहियों की अनदेखी करते हुए, क्षेत्र के लिए दीर्घकालीन होंगे। इतने सटीक व प्रभावी हमले ने इस्राईल के बुनियादी व स्ट्रेटेजिक ढांचों को ख़तरे में डाल दिया है। पत्र ने लिखा है कि इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि ईरान ने अपने हथियारों का ध्यान योग्य भाग लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन को या तो स्थानांतरित कर दिया है या फिर ज़रूरत पड़ने पर बड़ी तेज़ी से स्थानांतरित कर सकता है। एक मशहूर वेबसाइट देबका फ़ाइल ने भी ज़ायोनी सेना के जनरलों के हवाले से कहा है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ईरान का अगला हमला, संयुक्त अरब इमारात पर होने से पहले, इस्राईल के ख़िलाफ़ नहीं होगा। इस आधार पर ज़ायोनी सेना अपने आपको को ईरान के क्रूज़ मीज़ाइलों और ड्रोन विमानों से मुक़ाबले के लिए तैयार कर रही है जो संभावित रूप से ईरान, इराक़, सीरिया, लेबनान या ग़ज़्ज़ा पट्टी के विभिन्न क्षेत्रों से इस्राईल के रणनैतिक लक्ष्यों को निशाना बनाएंगे। अलबत्ता इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब के बाद ईरान का अगला लक्ष्य संयुक्त अरब इमारात (यू.ए.ई.) होगा। इस आधार पर अगर ईरान ने पहले यूएई को लक्ष्य बनाया तब भी भी अगले चरण में इस्राईल पर हमला ज़रूर करेगा।

ज़ायोनी मीडिया में किए जाने वाले इस प्रोपेगंडे के कुछ राजनैतिक व प्रचारिक लक्ष्य हो सकते हैं, जैसेः

  1. ज़ायोनी शासन को अधिक हथियारों से लैस करने के लिए अमरीका व यूरोप को मजबूर करना। हारेत्ज़ के लेख का यह भाग इस वास्तविकता को अच्छी तरह स्पष्ट करता हैः “हिज़्बुल्लाह के पास राॅकेटों का जो बड़ा भंडार है उसके दृष्टिगत अतीत में इसके अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा कि इस्राईल को एक ध्यान योग्य सैन्य श्रेष्ठता हासिल हो।”
  2. ईरान को इस्राईल के लिए ख़तरा बता कर ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्यवाही के लिए अमरीका को मजबूर करना। इस संबंध में पत्र का कहना हैः “ईरान के साथ युद्ध न करने का ट्रम्प सरकार का फ़ैसला इस बात का कारण बनेगा कि सऊदी गठजोड़, यूएई और इस्राईल को तबाह करने की कोशिश में तेहरान का हाथ खुला रहे। इस्राईल की संयुक्त सैन्य कमान का भी यही मानना है कि ईरान इस अवसर को हाथ से नहीं जाने देगा।”

बहरहाल जो बात निश्चित है वह यह है कि अमरीका व यूरोप वाले जानते हैं कि क्षेत्र में उनके रणनैतिक हितों पर तेहरान का प्रभुत्व और ईरान का बढ़ता हुआ प्रभाव, मज़ाक़ नहीं है और ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य विकल्प के इस्तेमाल के फ़ैसले का नतीजा ऐसा होगा जिसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। इस आधार पर ज़ायोनी शासन एक-दो लेखों या दावों के माध्यम से अमरीका व यूरोप को इस प्रकार के फ़ैसलों पर विवश नहीं कर सकता। 

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