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Tuesday, October 19, 2021
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जनरल सलामी की ललकारः हम जब मारते हैं तो बता देते हैं… हमारी ताक़त और इज़्ज़त, आशूरा की देन…

रिपोर्ट – सज्जाद अली नायाणी

अभी तो ताक़त की झलक दिखायी है… यह रही सऊदी अरब की सब से बड़ी गलती…

विदेश – क्रांति संरक्षक बल, आईआरजीसी के कमांडर, जनरल सलामी ने बुधवार को अपने एक भाषण में कहा है कि हमारी आज जो ताक़त व इज़्ज़त, स्वाधीनता और शांति व सुरक्षा है वह आशूरा युद्ध की देन है।

जनरल सलामी ने कहा कि हमारी रक्षा का सिलसिला 40 साल पहले शुरु हुआ था जो अब तक जारी है और 8 वर्षीय युद्ध हमारी रक्षा प्रक्रिया का एक भाग था।

आईआरजीसी के कमांडर ने कहा कि हम 40 वर्षों से लड़ रहे हैं, आज हम दुश्मनों की कल्पना से बहुत बड़ी ताक़त बन चुके हैं क्योंकि दुश्मनों को हमारे बारे में जो कुछ पता है वह हमारी कुल शक्ति की एक झलक मात्र है।

उन्होंने कहा कि ईरान की शक्ति फैल चुकी है और उसके स्तंभ इतने बड़े हैं कि दुश्मन के लिए उनकी अनदेखी संभव नहीं है।

जनरल सलामी ने कहा कि यह वह ताक़त है जिसकी वजह से जब यमन के अंसारुल्लाह जैसा कोई संगठन हमला करता है तो दुश्मन इस हमले को हमारी तरफ से किया गया हमला कहता है।

उन्होंने कहा कि अंसारुल्लाह क्रांति की एक विकसित पीढ़ी है, वह आज शक्ति का एक विशाल भंडार हैं कि अगर स्वतंत्र कर हो जाए तो पूरा रणक्षेत्र बदल जाएगा और इस हक़ीक़त को दुश्मन जानता है।

जनरल सलामी ने कहा कि हम दुश्मन से न डरने की सीमा पर पहुंच चुके हैं और जब भी हम वार करते हैं तो ढंके की चोट पर स्वीकार करते हैं, क्या हमने अमरीकी ड्रोन विमान को  मार कर एलान नहीं किया?

उन्होंने कहा कि अब खतरे हमारी सीमा से आगे हैं, अब दुश्मनों को इस्लामी जगत की शक्ति को अतीत की भांति नहीं समझना चाहिए, सब कुछ बदल गया है।

उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर गर्व है कि क्षेत्र में हर जटिल हमले के पीछे दुश्मन को हमारा हाथ नज़र आता है।

जनरल सलामी ने दुश्मनों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा काम न करें कि शक्ति का बांध टूट जाए, सही से सोचें और भावना में फैसला न करें जैसा कि तीन युरोपीय देशों ने भावना में बह कर ईरान के खिलाफ बयान जारी कर दिया। खतरा पैदा करने की हमारी ताक़त बहुत ज़्यादा बढ़ चुकी है लेकिन हम संयम व धैर्यवान हैं, हंगामा नहीं करना चाहते लेकिन हंगामा करने वालों को मुंहतोड़ जवाब ज़रूर देंगे।

दर अस्ल, सऊदी कंपनी आरामको पर जब यमन के अंसारुल्लाह संगठन और यमनी सेना ने ड्रोन हमला किया तो  उससे सऊदी अरब और अमरीका ने अपनी कमज़ोरी छुपाने के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराना आरंभ कर दिया। उनका कहना था कि इतना सटीक और जटिल हमला अंसारुल्लाह नहीं कर सकते ज़रूर इसके पीछे ईरान का हाथ है। ईरान पर आरोप साबित करने के लिए सऊदी अरब ने हमले की जटिलता स्वीकार की और ईरान पर आरोप लगा दिया किंतु यही सऊदी अरब की बड़ी गलती थी क्योंकि इस तरह से उसने ईरान की सैन्य शक्ति और हमले की क्षमता का एलान कर दिया जिससे क्षेत्र के छोटे बड़े बहुत से देशों में भय व्याप्त हो गया। सऊदी अरब द्वारा ईरान पर आरोप लगाने से यह विचार आम हुआ कि अगर ईरान, सऊदी अरब को तेल प्रतिष्ठान को इतनी सफाई से निशाना बना सकता है तो फिर अन्य देशों कैसे स्वंय को सुरक्षित समझ सकते हैं ?

अब तक सऊदी अरब अपने छोटे बड़े अरब घटकों को ईरान के मुकाबले में रक्षा का विश्वास दिलाता था किंतु अब वह स्वंय निशाना बन चुका है

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