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Tuesday, October 26, 2021
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रूस के एस-400 मिसाइल के बाद अब एस-500 मिसाइल व्यवस्था, अंतरिक्ष में भी मार करने में सक्षम इस व्यवस्था से अमरीकी रक्षा उद्योग संकट में !

रिपोर्ट – सज्जाद अली नयाने

रूस ने एस-400 मिसाइल ढाल व्यवस्था से तहलका मचाने के बाद अब पेश कर दी एस-500 मिसाइल व्यवस्था, अंतरिक्ष में भी मार करने में सक्षम इस व्यवस्था से अमरीकी रक्षा उद्योग संकट में ।

विदेश – रूस ने एस-400 मिसाइल ढाल व्यवस्था का अनावरण किया और इसकी उपयोगिता दुनिया के देशों के सामने आई तो अमरीकी रक्षा उद्योग के लिए गंभीर संकट पैदा हो गया। यह संकट रूस की एस-300 मिसाइल ढाल व्यवस्था ने ही उत्पन्न कर दिया था।

इसका कारण यह है कि अमरीका की रेथियोन नामक कंपनी जो पैट्रियट मिसाइल बनाती है वित्तीय समस्याओं का आहास करने लगी क्योंकि धीरे धीरे कई देशों ने पैट्रियट के बजाए एस-300 और एस-400 मिसाइल ढाल व्यवस्था ख़रीदना शुरू कर दिया। ईरान ने एस-300 मिसाइल व्यवस्था रूस से ख़रीदी। सीरिया ने भी यह व्यवस्था ख़रीदी। तुर्की ने एस-400 व्यवस्था का सौदा रूस से किया और भारी अमरीकी दबाव और धमकियों के बावजूद अंकारा सरकार कह रही है कि वह इस सौदे से पीछे नहीं हटेगी। नैटो में शामिल अन्य कुछ देश भी रूस से यह मिसाइल ढाल व्यवस्था ख़रीद चुके हैं।

यही नहीं सऊदी अरब ने भी रूस से एस – 400 का सौदा किया है और भारत ने भी रूस से एस-400 के कई सेट ख़रीदने का समझौता किया है। क़तर भी उन देशों में शामिल हैं जो रूस से एस-400 ख़रीदना चाहते हैं।

रूसी मिसाइल ढाल व्यवस्था की मांग इतनी बढ़ने का कारण यह है कि एक तरफ़ तो अमरीका ने अपनी मिसाइल ढाल व्यवस्था बेचने के लिए कठोर शर्तें लगा रखी हैं जो बहुत से देशों को स्वीकार नहीं हैं और दूसरी बात यह है कि दुनिया के कुछ देश अमरीका से मिसाइल ढाल व्यवस्था तो ख़रीदना चाहते हैं लेकिन पैट्रियट के बजाए थाड व्यवस्था ख़रीदना चाहते हैं और अमरीका ने यह व्यवस्था बेचने के लिए बड़ी कठोर शर्तें रखी हैं।

यहां तक कि सऊदी अरब ने कठोर शर्तों की वजह से रूस से एस-400 मिसाइल ढाल व्यवस्था का सौदा कर लिया अलबत्ता अमरीका की ओर से इसमें गंभीर रूप से रुकावट डाली जा रही है और इस बात की संभावना है कि सऊदी अरब को अपना फ़ैसला बदलना पड़े।

सऊदी अरब थाड या एस-400 मिसाइल ढाल व्यवस्था इसलिए ख़रीदना चाहता है कि उसके पास मौजूद पुरानी पैट्रियट मिसाइल ढाल व्यवस्था बुरी तरह नाकाम हुई है। यमन पर सऊदी अरब के हमलों के नतीजे में यमन से फ़ायर किए गए मिसाइल राजधानी रियाज़ तक पहुंच रहे हैं और सऊदी अरब के अनेक इलाक़ों को निशाना बना रहे हैं। पैट्रियट मिसाइल व्यवस्था यमन से फ़ायर किए जाने वाले मिसाइलों का रास्ता रोकने में नाकाम साबित हुई है।

रूस अपनी मिसाइल ढाल व्यवस्था के साथ बड़ी मज़बूती से वायु रक्षा उद्योग के क्षेत्र में उतर पड़ा है। रूस ने एस-500 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम पेश करके तो सबको चौंका दिया है। यह सिस्टम अंतरिक्ष में हमलावर मिसाइल को इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखता है। इसका साफ़ मतलब यह है कि मिसाइल उद्योग में अमरीका का वर्चस्व पूरी तरह धाराशायी होने जा रहा है।

अमरीका ने एफ़-22 और एफ़-35 युद्धक विमान विकसित करके यह कोशिश की थी कि वायु सामरिक उपकरणों के उद्योग में वह सारी दुनिया के हथियार उत्पादक देशों को चुनौती देता रहेगा और एफ़-16 युद्धक विमानों की तरह एफ़-35 और एफ़-22 विमानों की मांग दुनिया भर में बढ़ेगी लेकिन मिसाइल ढाल व्यवस्था ने इन युद्धक विमानों की उपयोगिता पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।

रूसी मीडिया ने ख़बर दी है कि जारी वर्ष के अंत तक एस-500 मिसाइल ढाल व्यवस्था रूसी सेना के हवाले कर दी जाएगी इसके प्रयोग और परीक्षण के सभी चरणों से गुज़ारा जा चुका है। इस व्यवस्था की सबसे ख़ास बात है अंतरिक्ष में सैटेलाइट और बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करके ध्वस्त कर देना। यह मिसाइल व्यवस्था एक ही समय में कोई तीव्र गामी लक्ष्यों को ध्वस्त कर सकती है और आठ सौ किलोमीटर की दूरी तक अपने लक्ष्य को तबाह कर सकती है।

रूसी टीकाकार ईवान कोलोवालोफ़ का कहना है कि रूस के एस-500 सिस्टम के सामने आने के बाद अब पश्चिमी के लिए बहुत मुश्किल हो गया है कि वह ख़ुद को रूस के बराबर पहुंच सके। अमरीकी मैगज़ीन नेशनल इंट्रेस्ट ने लिखा कि एस-300 से एस-400 तक पहुंचने में रूस को तीस साल से अधिक समय लगा मगर एस-400 से एस-500 तक पहुंचने में मास्को को कुछ ही साल लगे यह बहुत बड़ी सामरिक उपलब्धि है जिसने अमरीका के रक्षा उद्योग के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

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